1999
कुछ वक़्त कुछ ऐसे लोगों के साथ बैठना हुआ जिन्होंने अमृता प्रीतम को बहुत करीब से जन था। एक शाम मैंने अपनी poem पढ़ी - "The River" तो एक पंजाबी का बहुत respected poet जिसका नाम अब याद नहीं, poem ख़तम होने पर अमृता की याद में डूब गया। मुझे वोह बहुत ही अच्छा लगता था। वहां महफिल में सभी बात करते थे मुझसे; meeting वाले दिन बहुत phone भी आते थे याद दिलाने के लिए के में ज़रूर आऊं। मगर यह बूढा शायर मेरी presence को acknowledge भी नहीं करता था।
उस दिन शाम को बहुत देर तक सभी अमृता को याद करते रहे। यह बात अमृता के गुज़रने से पहले की है। बक्शीश aunty जो दिल्ली से recently लौटी थी, अमृता से मिल कर आई थी। उन्होने बताया की वोह बड़ी बीमार है। फिर gossiping का दौर शुरू हो गया की अमृता की cigarette और शराब ने उसका यह हाल किया है।
में मन ही मन में सोचती रही की नानी जो थोडे दिन हुए गुज़री थी, उसने तो कभी cigarette और शराब को हाथ भी नहीं लगाया और उमर में अमृता से कम ही थी, वोह क्यों मर गई।
जिन्होंने अमृता को समझा नहीं, उन्हें सिर्फ़ उसकी cigarette ही दिखाई देती है। मेरे खयालों में वोह सोलह साल की है जो छुप-छुप कर साहिर के फेंके हुए stubs उठा लिया करती थी। एक deep, unconditional attachment थी - रूहानी - वारिस शाह की हीर जैसे। शायद तभी जब उसका दिल टूटा तो उसने वारिश शाह को ही हूक मारी। ... आज आखां वारिस शाह नु, कित्ते कब्बरान विचों बोल, ते आज किताब-ऐ-इश्क दा कोई अगला वरखा फोल।
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2005
दिल्ली में एक शाम दीप auntie के साथ बिताने के बाद जब वोह मुझे अपनी car में घर drop करने आयीं तो कहने लगीं की अमृता ने भी बुलाया हैं, कह रही थी की पता नहीं कितना वक़्त है, इक वार मिल जा। मेरा दिल हुआ पर में नहीं गई। शायद दो या तीन महीनों के बाद अमृता प्रीतम नहीं रही।
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2006
इस साल फिर दिल्ली जाना हुआ - कई दुकानों में ढूंढी पर नहीं मिली। दीप auntie को बोला तो उन्होने अपनी copy निकाल कर दे दी। अमृता ने ख़ुद ही दी थी उनको। . . . कहते हैं की खुस्वंत सिंह ने अमृता को मज़ाक में कहा था की अमृता तेरी ज़िन्दगी की कहानी क्या है, एक रसीदी टिकेट (revenue stamp) के पीछे ही फिट हो जायेगी।
ना जाने क्या expectation थी की अमृता क्या share करेगी। एक शीदी-सादी जीवनी है। एक ऐसी औरत का सफर जिसने अपने दिल की आवाज़ को एक strict male-dominated दुनिया में जिंदा रखने की हिम्मत की। उसने अपने figurative और literal सपने बिना किसे शर्म और झिझक के, कागज़ पर लिख डाले। नहीं - उसका लिखा fiction ज़रूर candid है, मगर उसकी autobiography में एक बड़ी ही apparent सी झिझक है जो शायद कुछ लोगों को दिख जाए -- या फिर शायद मैंने ही कुछ ज़यादा देख लिया।
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आज
अमृता तुमने बड़ी ही deep poetry लिखी; एक औरत के point-of-view से।
अमृता - कुछ खुदा पर भी लिखा है तो सुनाओ! खुदा को भी आइना दिखाओ!
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Friday, August 7, 2009
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